Shiv Bhakti संसार बंधन से मुक्ति उपाय: The Path to Liberation
Shiv Bhakti संसार बंधन से मुक्ति उपाय
श्रीकृष्ण और युधिष्ठिर का अद्भुत संवाद
पूर्व काल में महर्षि उपमन्यु ने श्रीकृष्ण को जो उपदेश दिया था ,उसी को भगवान श्रीकृष्ण युधिष्ठिर को सुनाते हुए बताते है शिवभक्ति Shiv Bhakti किसे प्राप्त होती है और शिवभक्ति के सिवा संसार बंधन से छुटकारा पाने के लिए अन्य कोई उपाय नहीं है।
करोड़ों जन्मों के पुण्यों का फल है ‘शिव भक्ति’ Shiv Bhakti
जन्मकोटिसहस्रेषु नानासंसारयोनिषु।
जन्तोर्विगतपापस्य भवे भक्तिः प्रजायते॥ १६॥
कोटि सहस्र जन्मोंतक नाना प्रकारकी संसारी योनियोंमें भटकते-भटकते जब कोई जीव सर्वथा पापोंसे रहित हो जाता है, तब उसकी भगवान् शिवमें भक्ति होती है॥ १६४॥
उत्पन्ना च भवे भक्तिरनन्या सर्वभावतः।
भाविनः कारणे चास्य सर्वयुक्तस्य सर्वथा॥ १६५॥
भाग्यसे जो सर्वसाधनसम्पन्न हो गया है, उसको जगत्के कारण भगवान् शिवमें सम्पूर्णभावसे सर्वथा अनन्य भक्ति प्राप्त होती है॥ १६५॥
देवताओं के लिए भी दुर्लभ है महादेव की अनन्य कृपा
एतद् देवेषु दुष्प्रापं मनुष्येषु न लभ्यते।
निर्विघ्ना निश्चला रुद्रे भक्तिरव्यभिचारिणी॥ १६६॥
रुद्रदेवमें निश्चल एवं निर्विघ्नरूपसे अनन्य-भक्ति हो जाय—यह देवताओंके लिये भी दुर्लभ है। मनुष्योंमें तो प्रायः ऐसी भक्ति स्वतः नहीं उपलब्ध होती है॥ १६६॥
तस्यैव च प्रसादेन भक्तिरुत्पद्यते नृणाम्।
येन यान्ति परां सिद्धिं तद्भागवतचेतसः॥ १६७॥
भगवान् शंकरकी कृपासे ही मनुष्योंके हृदयमें उनकी अनन्यभक्ति उत्पन्न होती है, जिससे वे अपने चित्तको उन्हींके चिन्तनमें लगाकर परमसिद्धिको प्राप्त होते हैं॥ १६७॥
संसार बंधन से मुक्ति का एकमात्र उपाय | Path to Liberation
ये सर्वभावानुगताः प्रपद्यन्ते महेश्वरम्।
प्रपन्नवत्सलो देवः संसारात् तान् समुद्धरेत्॥ १६८॥
जो सम्पूर्ण भावसे अनुगत होकर महेश्वरकी शरण लेते हैं, शरणागतवत्सल महादेवजी इस संसारसे उनका उद्धार कर देते हैं॥ १६८॥
एवमन्ये विकूर्वन्ति देवाः संसारमोचनम्।
मनुष्याणामृते देवं नान्या शक्तिस्तपोबलम्॥ १६९॥
इसी प्रकार भगवान् शिव की स्तुतिद्वारा अन्य देवगण भी अपने संसारबन्धनका नाश करते हैं; क्योंकि महादेवजीकी शरण लेनेके सिवा ऐसी दूसरी कोई शक्ति या तपका बल नहीं है जिससे मनुष्योंका संसारबन्धनसे छुटकारा हो सके॥ १६९॥
~ महाभारत, अनुशासन पर्व , दान पर्व, अध्याय 17