भगवती मंत्र स्वयं सिद्ध का रहस्य | Bhagwati Mantra & Shakti Upasana

भगवती मंत्र Bhagawati Mantra: एक स्वयं सिद्ध विद्या (A Self-Proven Power)

Advertisement

Bhagawati Mantra भगवती मंत्र तो बिल्कुल स्वयं सिद्ध होता है। उसको सिद्ध नहीं किया जाता है। अपने वचनबद्धता, अपने को वचन दे, और अपने टेढ़-टाढ़ न रहे। सीधा बात यह है। अपने भी सीधा रहे।

माँ भवानी तक कैसे पहुँचें?

आपको यदि भगवती, भवानी मिलना चाहेंगी, आपको घेर करके आपके वैसे ही सज्जनों से, महापुरुषों से वातावरण से, आप घूमते-घूमते ले आ के उस दरवाजे तक खड़ा कर देंगी। कि यह लो यह मैं हूँ, यही मेरी विद्या है और यही मेरा दर्शन है और यही मेरा सर्वसिद्धियाँ है। इसे तुम लो। किसी का सुन करके आप कान से और आँख से बहुत फर्क होता है। इस तरह की यदि आपकी दृष्टि रहा तो आप भगवती को कहाँ पा पायेंगे, भगवान को कहाँ पायेंगे। आप तो अपने में ही उलझे हुए हैं

कोई कर्मकांड नहीं, सिर्फ ‘माँ’ का स्मरण (True Devotion Beyond Rituals)

जो भगवती हैं, भवानी हैं, वह हमलोगों के बिल्कुल पीछे-पीछे घूम रही हैं, टहल रही हैं, मिलने को आतुर हैं बन्धुओं! परन्तु पूजा न पाठ, जाने अष्टभुजा वाली हालत है। मैं नहीं जानता पूजा-पाठ करना — हे भगवती अष्टभुजा! मैं सिर्फ आपका स्मरण जानता हूँ। आप माँ हैं, मैं यही जानता हूँ। माँ, माँ कह के मैं रट लेता हूँ। इससे अधिक कुछ नहीं जानता हूँ। (माँ ) आपके यदि मैं योग्य हूँ, मेरी में योग्यता है, तो आप मुझे ऐसे ही स्वीकार करेंगे। मैं यदि अयोग्य हूँ तो मेरे जीवन तो जर्जर है ही और जिस तरह की यह अयोग्यता है, उस अयोग्यता के हट जाने पर और हटाने के लिये, आप ही प्रयत्न कर सकती हैं। यह मेरी प्रयत्न की, मेरी बुद्धि की बात नहीं है। मेरी बुद्धि की विषय नहीं है।

क्षमा और कृपा

वह मिलेंगी। अवश्य मिलेंगी, यदि हमारी मति ठीक रहेगी, गति ठीक रहेगा और हम वचनबद्धता को स्वीकार करेंगे। हम जब तक भूले थे, भटके थे, अन्धकार में थे, तब तक मुझसे जो कुछ भी हुआ, उस सबको वह क्षमा कर देंगी।

माँ भगवती का स्वरूप: जाति, धर्म और काल से परे

भगवती का कोई जाति नहीं होता। विष्णु के जात, ब्रह्मा के जात के, शिव के जात के ये नहीं होतीं। या देश के जात के, काल के जात के, समय के जात के नहीं होती। वह सदैव कुमारी होती हैं और उनका कोई जाति, धर्म और देश नहीं होता। वह सब देश के होती हैं, सर्वकाल में होती हैं। बराबर वह कुमारी रहती हैं, पंचकन्याओं की तरह। सदैव, सदैव कुमारी रहती हैं।

शक्ति उपासना का विज्ञान और सावधानियां

जिस शक्ति की उपासना आप करते हैं उसके स्वरूपों के बारे में भी आपको अध्ययन करना चाहिये। वह शक्ति स्व–संहारक भी हो सकती है। प्राप्त करने वाला नासमझी में उससे अपना संहार भी कर सकता है। जैसे अग्नि एक शक्ति है जो जलाकर भस्म भी कर सकती है तथा संयम से काम लेने पर उसी अग्नि पर आप खाना पका सकते हैं, उसे तपा सकते हैं तथा अनेकानेक जीवन रक्षक कार्य कर सकते हैं।
रेलगाड़ी एक शक्ति है– उसके सामने खड़े हो गये तो वह काट देगी लेकिन बगल से उस पर सवार होकर सुदूर स्थान पर सुरक्षित पहुँच सकते हैं। इसलिये शक्ति के स्वरूप तथा उसके विभिन्न स्वरूपों के गुण–धर्म के बारे में उपासक को अच्छी समझ रखना परमावश्यक है।

Leave a Comment