योगासन में श्वास का महत्व: Breath Awareness in Yoga
योगासन में श्वास का महत्व: Breath Awareness in Yoga
हम आसन का अभ्यास करते समय अपनी जागरूकता को श्वास पर क्यों केंद्रित करते हैं और अपनी श्वास को शारीरिक गति (Breath Awareness) के साथ समन्वयित क्यों करते हैं? क्या कोई हानि है यदि हम आसन का अभ्यास करते समय श्वास लेने और छोड़ने के निर्देश का पालन नहीं कर पाते हैं?
योग सिर्फ व्यायाम नहीं है | Yoga is Not Just an Exercise
लाखों लोग ऐसे हैं जो बिना श्वास की जागरूकता Breath Awareness के आसन का अभ्यास करते हैं और जिन्हें यह पता ही नहीं है कि श्वास को गति के साथ कैसे जोड़ा जाए। जब हम उस तरह से अभ्यास करते हैं, तो आसन केवल व्यायाम बनकर रह जाते हैं, और वे अब आसन नहीं रहते।
‘आसन’ शब्द का अर्थ है स्थिर होना – ‘स्थिरम् सुखम् आसनम्।’
- पतंजलि के योग सूत्रों के अनुसार, आसन को एक स्थिर और आरामदायक स्थिति के रूप में परिभाषित किया गया है।
- क्या वह स्थिरता केवल शारीरिक है? नहीं।
- आसन न केवल भौतिक शरीर को, बल्कि प्राणिक और मानसिक शरीरों को भी प्रभावित करते हैं।
- ये तीन स्तर हैं जहाँ आसन का सीधा प्रभाव पड़ता है।
प्राण ऊर्जा और श्वास का गहरा संबंध | Connection Between Prana & Breath
योग परम्परा कहती है कि आसन शरीर में प्राणों के व्यवहार को बदल देते हैं। प्राण अधिक संतुलित हो जाते हैं। यदि प्राणों का क्षय, विकृति और विक्षेप होता है, तो हम आसनों के अभ्यास से अपना संतुलन पुनः प्राप्त करने में सक्षम होते हैं। प्राणों को श्वास द्वारा नियंत्रित किया जाता है। श्वास लेना और छोड़ना शरीर में प्राण शक्ति के प्रवाह को नियंत्रित करता है। संतुलित श्वास-प्रश्वास प्राणमय शरीर में सामंजस्य पैदा करता है।
Panic Attack में भी श्वास पर ध्यान क्यों? Breath Awareness
जब लोग चिंता के दौरों से पीड़ित होते हैं, तो सबसे पहली बात जो उनसे कही जाती है, वह है, ‘श्वास लो और श्वास छोड़ो। अंदर श्वास लो और बाहर श्वास छोड़ो।’ अंदर और बाहर श्वास लेने के बाद, लोग कहते हैं, ‘ओह, मुझे बेहतर महसूस हो रहा है।’ Breath Awareness
हम हर समय श्वास ले रहे हैं और छोड़ रहे हैं, तो फिर हमें पैनिक अटैक के समय श्वास पर ध्यान केंद्रित करने के लिए क्यों कहा जाता है? क्योंकि श्वास विकृत और बिखरी हुई प्राणिक ऊर्जा को पुनः संतुलित करती है।
शरीर पर आसन के 5 मुख्य प्रभाव | Asana Impact
योग मानता है कि पाँच स्तर हैं जिन पर आसन शरीर पर अपना प्रभाव डालते हैं।
- पहला है भौतिक;
- दूसरा है श्वास;
- तीसरा है मानसिक चित्रण;
- चौथा है चक्र; और
- पाँचवाँ है मंत्र।
ये पाँच घटक हमारे अपने शरीर के विभिन्न पहलुओं से संबंधित हैं। गति भौतिक शरीर के द्वारा होती है। जब हम गति के साथ श्वास को जोड़ते हैं, तो यह प्राणिक शरीर को प्रभावित करती है। जब हम श्वास और गति के साथ मानसिक चित्रण को जोड़ते हैं, तो यह मानसिक शरीर को प्रभावित करती है। जब हम श्वास और गति के साथ चक्र को जोड़ते हैं, तो यह विज्ञानमय कोश, चेतना के आयाम को प्रभावित करती है। जब हम आसन में मंत्र पर ध्यान केंद्रित करते हैं, तो यह आनंदमय कोश, मानसिक शरीर को प्रभावित करती है। ये तीव्रता के विभिन्न स्तर हैं, जो अपने प्रति हमारी जागरूकता को गहरा करते हैं।
अभ्यास से योगी बनने तक का सफर (Progressing as a True Yogi)
यदि आप गति के साथ अपनी श्वास का उपयोग नहीं करते हैं तो कोई हानि नहीं है। हर कोई हर समय ऐसा ही करता है। हालांकि, यह बेहतर है क्योंकि यह आपके स्वयं के प्रति आपकी धारणा को, आपकी अचेतन और स्वायत्त गतिविधियों पर आपके प्रभुत्व को दर्शाता है।
यदि आप गति के साथ श्वास के प्रति जागरूक होने का कौशल विकसित कर सकते हैं, तो आप योगी बनने की ओर एक कदम और आगे बढ़ जाते हैं। जब आप मानसिक चित्रण करने में सक्षम होते हैं, तो आप योगी बनने की ओर एक और कदम आगे बढ़ जाते हैं। यदि आप आसन का अभ्यास करते समय मंत्र करने में सक्षम हैं, तो आप एक बेहतर योगी बनने की ओर एक और कदम बढ़ाते हैं। यदि आप चक्रों, मंत्र, श्वास और गति को एक साथ मानसिक रूप से देख पाने में सक्षम हैं, तो आप एक बेहतर योगी बनने की ओर एक और कदम आगे बढ़ जाते हैं।
ये अलग-अलग चरण हैं। यदि आप कोई भी कदम नहीं उठाना चाहते हैं, तो जैसा कर रहे हैं वैसे ही करते रहें, एक व्यायाम के रूप में, लेकिन फिर उन लाभों की अपेक्षा मत कीजिए जो आपको लगता है कि योग का अभ्यास करने से आपको मिलेंगे। योगाभ्यास में खुद को स्थिर करने के लिए आपको योग के अभ्यास में प्रगति करनी होगी।