अघोरेश्वर बाबा कीनाराम Baba Keenaram जी के चमत्कार:  ‘क्रीं कुंड’ रहस्य

Baba Keenaram जी के चमत्कार:  ‘क्रीं कुंड’ रहस्य

अघोर पंथ और क्रीं कुंड की महिमा

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अघोर पंथ और अवधूत परंपरा में परमपूज्य बाबा कीनाराम Baba Keenaram जी का स्थान अलौकिक और वंदनीय है। वाराणसी का ‘क्रीं कुंड’ (कीना राम स्थल) आज भी उनके अलौकिक योगबल और जन-कल्याणकारी  जीवित प्रमाण है।

बाबा कीनाराम जी के जीवन के अद्भुत चमत्कार

जलती चिता से मृत बालक को जीवनदान

​बाबा कीनाराम Baba Keenaram जी जलती चिता से बालक को जीवित करने की क्षमता रखते थे। बाबा कीनाराम Baba Keenaram जी के जीवन का यह सबसे पहला चमत्कार माना जाता है। किशोरावस्था में जब वे यात्रा पर थे, तब उन्होंने देखा कि एक गरीब महिला अपने एकमात्र मृत पुत्र को श्मशान में जला रही थी और रो रही थी। बाबा कीनाराम जी ने उस महिला की व्याकुलता देखकर चिता के पास जाकर बालक को पुकारा।  सब दंग रह गए जब वह मृत बालक चिता पर उठ बैठा और हँसने लगा!

​बिना नाव के गंगा की लहरों पर चलना

काशी में प्रवास के दौरान, बाबा कीनाराम जी अक्सर बिना किसी नाव के गंगा नदी की धारा पर ऐसे चलते थे जैसे किसी भूमि पर चल रहे हों। एक बार जब एक नाविक ने उन्हें पार ले जाने से मना कर दिया और उनका उपहास उड़ाया, तो बाबा जी शांत भाव से जल पर पैदल ही चलकर गंगा पार कर गए।

​वाराणसी का सिद्ध ‘क्रीं कुंड’ kring kund Baba Keenaram

वाराणसी स्थित क्रीं कुंड (कीना राम स्थल) को बाबा कीनाराम Baba Keenaram जी ने अपने तपोबल से सिद्ध किया था। मान्यता है कि बाबा ने इस कुंड के जल को ऐसा आशीर्वाद दिया कि इसमें स्नान करने से असाध्य से असाध्य रोग, कुष्ठ रोग और बांझपन जैसी समस्याएँ मिट जाती हैं। आज भी सैकड़ों वर्षों बाद भी यह कुंड लाखों श्रद्धालुओं के लिए चमत्कार का केंद्र बना हुआ है।

​परम गुरु-भक्त: बाबा लोटा दास जी और उनके चमत्कार

बाबा लोटा दास जी, बाबा कीनाराम Baba Keenaram जी के अत्यंत प्रिय और अनन्य भक्त-शिष्य थे।  उनका नाम “लोटा दास” इसलिए पड़ा क्योंकि वे हमेशा अपने गुरुदेव का लोटा हाथ में धारण किए उनकी सेवा में लीन रहते थे। एक बार बाबा कीनाराम जी के आश्रम में अचानक सैकड़ों साधुओं और अतिथियों का आगमन हुआ। आश्रम में भोजन की कमी थी।  बाबा कीनाराम जी ने लोटा दास जी से कहा कि वे अपने कमंडल/लोटे से प्रसाद बाँटना शुरू करें।
बाबा लोटा दास जी ने गुरु-आज्ञा मानकर अपने छोटे से लोटे से प्रसाद निकालना शुरू किया और देखते ही देखते सैकड़ों लोगों ने भरपेट भोजन और मिठाइयाँ खाईं, फिर भी वह लोटा खाली नहीं हुआ!

​हिंसक बाघ को बिल्ली की तरह शांत करना

एक समय जब जंगल में प्रवास के दौरान एक अत्यंत भयानक बाघ ने आश्रम के क्षेत्र में हमला कर दिया, तो बाबा लोटा दास जी केवल अपना लोटा हाथ में लेकर आगे बढ़े।  उन्होंने गुरु कीनाराम जी का नाम स्मरण किया और उस हिंसक पशु को स्पर्श किया। चमत्कार ऐसा हुआ कि वह बाघ एक बिल्ली की तरह शांत होकर बाबा लोटा दास जी के चरणों में बैठ गया।

​एक गाँव में जहाँ भयंकर सूखा पड़ा था और कुएँ सूख चुके थे, गाँव वाले प्यास से व्याकुल थे। बाबा लोटा दास जी ने अपने लोटे से मात्र दो बूँद जल उस सूखे कुएँ में डाला और बाबा कीनाराम जी का ध्यान किया।  क्षणभर में उस सूखे कुएँ से जल की शीतल धारा फूट पड़ी और पूरा गाँव तृप्त हो गया।

अघोर का असली अर्थ

कहने का ​सार यह है कि बाबा कीनाराम जी का ‘अघोर’ रूप भय उत्पन्न करने वाला नहीं, बल्कि करुणा और लोक-कल्याण का पर्याय था।  बाबा लोटा दास जी की अटूट गुरु-भक्ति यह सिखाती है कि यदि शिष्य में पूर्ण समर्पण हो, तो गुरु की कृपा से लोटा जैसा साधारण पात्र भी अनंत शक्तियों का भंडार बन जाता है।

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