Brahma Muhurta Secrets: सुबह जल्दी उठने का दिव्य विज्ञान
Brahma Muhurta Secrets: सुबह जल्दी उठने का दिव्य विज्ञान: ब्रह्ममुहूर्त में क्यों उठाना चाहिए?
यद्यपि उपरोक्त प्रश्न का वास्तविक उत्तर तो इसका आचरण करने पर ही मिल सकता है, क्योंकि किसी भी शंका का समाधान उसके उत्तर में प्रतिपादित तथ्यों की अनुभूति से ही सम्भव है, तथापि इतना जान लेना चाहिये कि यह समय शारीरिक स्वास्थ्य, बुद्धि, आत्मा, मन आदि सभी की दृष्टि से निद्रा छोड़कर जग जाने के लिए परम उपयुक्त है।
इस समय प्रकृति मुक्तहस्त से स्वास्थ्य, बुद्धि मेधा प्रसन्नता और सौन्दर्य की अपार राशि लुटाती है। इस समय बहने वाली वायु के एक एक कण में संजीवनी शक्ति का अपूर्व संमिश्रण रहता है। यह वायु रात्रि में चन्द्रमा द्वारा पृथ्वी पर बरसाये हुये अमृत विन्दुओं को अपने साथ लेकर बहती है। इसीलिये शास्त्रों मे इसे वीरवायु के नाम से स्मरण किया है। जो व्यक्ति इस समय निद्रा त्याग कर तथा चैतन्य होकर इस वायु का सेवन करते हैं उनका स्वास्थ्य सौन्दर्य और आयुष्य वृद्धि को प्राप्त होता है। मन प्रफुल्लित हो जाता है एव आत्मा में नव चेतनता का अनुभव होता है।
आयुर्वेद का अनुसार ब्रह्ममुहूर्त | Brahma Muhurta Secrets
आयुर्वेद कहता है-
वर्ण कीर्ति मतिं लक्ष्मी स्वास्थ्यमायुश्च विदन्ति ।
ब्राममुहूर्ते संजाग्रच्छ्रियं वा पंकजं यथा ॥ (भै० सार-६३)अर्थात्- ब्रह्म मुहूर्त Brahma Muhurta Secrets मे उठने से पुरुष को सौन्दर्य, लक्ष्मी, बुद्धि, स्वास्थ्य, आयु आदि की प्राप्ति होती है। उसका शरीर कमल के सदृश सुन्दर हो जाता है।
इसके अतिरिक्त सम्पूर्ण रात्री के पश्चात् प्रातः जब भगवान् सूर्य उदय होने वाले होते हैं तो उनका चैतन्यमय तेज आकाश मार्ग द्वारा विस्तृत होने लगता है। यदि मनुष्य सजग होकर स्नानादि से निवृत्त हो, उपस्थान एवं जप द्वारा उन प्राणाधिदेव भगवान सूर्य की किरणों से अपने प्राणों में अतुल तेज का आह्वान करे, तो वह पुरुष दीर्घजीवी हो जाता है।
आधुनिक विज्ञान के अनुसार ब्रह्ममुहूर्त के फायदे | Brahma Muhurta Secrets Benefits
आधुनिक विज्ञान के अनुसार समस्त ब्रह्माण्ड में व्याप्त वायु का विभाग साधारणतया निम्नक्रम से किया जाता है।
आक्सीजन ( प्राणप्रदवायु) 21 प्रतिशत
कार्बन डाईऑक्साइड (दूषित वायु) 1 प्रतिशत
नाईट्रोजन 78 प्रतिशत
कुल 1०० प्रतिशत
विज्ञान के अनुसार सम्पूर्ण दिन वायु का यही प्रवहण क्रम रहता है किन्तु प्रातः और सायं जब सन्धि काल होता है इस क्रम में कुछ परिवर्तन हो जाता है । साय काल जगत्प्राणप्रेरक भगवान् सूर्य के अस्त हो जाने से आक्सीजन (प्राण प्रद वायु) अपने स्वाभाविक स्तर से मन्द पड़ जाती है और मनुष्यों की प्राणशक्ति भी क्षीण हो जाती है उन्हें विश्राम की आवश्यकता अनुभव होने लगती है।
इसी प्रकार प्रातः काल के सूर्योदय के साथ ही उस वायु के स्तर में वृद्धि होना स्वाभाविक है । इसलिये यदि इस समय निद्रामुक हो कर मनुष्य उस वायु का सेवन करे तो उस का स्वास्थ्य वहुत अच्छा हो जाएगा- यह बतलाने की विशेष आवश्यकता ही नहीं है ।
दीर्घजीवन का मूल मंत्र
वास्तव में दीर्घजीवन का एक ही मूल मन्त्र है-
जल्दी सोओ जल्दी उठो । Early to go bed early to rise, make a man Healthy Wealthy and wise
अर्थात – जल्दी सोना और जल्दी उठना मनुष्य को स्वस्थ, धनवान और बुद्धि- मान बना देता है” की अंग्रेजी कहावत सर्वाश में सत्य ही है।
प्रातः जागरण से सौन्दर्य, बुद्धि और स्वास्थ्य में वृद्धि
प्रातः जागरण और महानता का पारस्परिक योग है। सभी महान व्यक्ति प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में ही उठते हैं, और इस समय नियम-पूर्वक प्रति दिन उठने वाले प्रत्येक व्यक्ति का जीवन, शारीरिक और बौद्धिक उन्नति से विलक्षण हो जाता है इस में किंचित् भी सन्देह नहीं ।
लिखने पढ़ने के लिये तो वास्तव में इस से उपयुक्त समय हो ही नहीं सकता । एकान्त और सर्वथा शान्त वायुमण्डल में जब कि मस्तिस्क बिलकुल उर्वर होता है, ज्ञानतन्तु रात्री विश्राम के बाद नव-शक्ति-युत होते हैं मनुष्य को वौद्धिक कार्य करने में विशेष श्रम नहीं करना पड़ता।
इसलिये हमें प्रकृति के इस अमूल्य वरदान से लाभ उठाना चाहिये और ऐसा अभ्यास डाल लेना चाहिये कि बिना किसी की महायता के प्रतिदिन उठ जावें। इस के लिये एक छोटा सा उपाय कार्य में लाया जा सकता है। रात्री में सोते समय यदि व्यक्ति अपनी आत्मा से प्रातः अमुक समय पर उठने का संकल्प व्यक्त करदे तो निश्चय ही उसी समय पर नींद खुल जायगी और यदि उस समय हमने आलस्य का।आश्रय नहीं लिया तो फिर कुछ दिनों में बिना किसी की सहायता के स्वतः उठने लगेगे।
- धर्मसम्राट करपात्रीजी महाराज