काम-उर्जा से कुंडलिनी जागरण! | Transmute sexual energy
काम-उर्जा से कुंडलिनी जागरण! | Transmute sexual energy
क्या करें जब सुंदर चेहरे को देखकर मन में कामवासना उठे और काम-केंद्र सक्रिय होने लगे? क्या करें जब सुबह जागने पर बिस्तर में लिंग्गोत्थान हो और काम-केंद्र सक्रिय होने लगे? Transmute sexual energy
योग में गुदाद्वार को भीतर खींचकर रोकने को “मूलबंध” लगाना कहते हैं। और गुदाद्वार के साथ ही मूत्रद्वार को भी भीतर खींचते हुए ध्यान सहस्त्रार चक्र पर केंद्रित करने को “योन-मुद्रा” कहते हैं। Transmute sexual energy
कुंडलिनी जागरण और योन-मुद्रा का विज्ञान (Science of Kundalini)
योन-मुद्रा कुंडलिनी जागरण के बाद हमारे शरीर पर घटने वाली प्रमुख घटनाओं में घटी एक घटना है। कुंडलिनी जागरण जब घटता है तो हमारा शरीर योन-मुद्रा में प्रवेश ‘करता’ है। योन-मुद्रा में प्रवेश करने पर हमारा ध्यान सहस्त्रार चक्र पर केंद्रित हो जाता है। और जैसे ही हमारा ध्यान सहस्त्रार चक्र पर केंद्रित होता है, नीचे के दोनों रास्ते, मलद्वार और मूत्रद्वार दोनों भीतर की ओर स्वतः ही मुड़ जाते हैं। जिस भांति हम मल-मूत्र को रोकने के लिए दोनों रास्तों को भीतर सीकोड़ते हैं, उसी भांति योन-मुद्रा के घटने पर दोनों रास्ते अपने से ही भीतर की ओर सिकुड़ जाते हैं और ऊर्जा सहस्त्रार चक्र की ओर बहने लगती है, जहां हमरा ध्यान होता है… लेकिन ऐसा शरीर में घटता है कुंडलिनी जागरण के बाद!!
इसी घटना को फिर दूसरे सिरे से लिया गया कि यदि कुंडलिनी जागरण होने पर “योन-मुद्रा” घटती है तो क्यों ना हम नीचे के गुदाद्वार और मूत्रद्वार दोनों द्वारों को बंद कर ध्यान को सहस्त्रार चक्र पर केंद्रित करते हुए योन-मुद्रा में प्रवेश करें ताकि कुंडलिनी जागरण के लिए यात्रापथ निर्मित हो सके! यानि कि घटना दूसरे छोर से भी घट सकती है!!
काम-ऊर्जा को मोड़ने का सही समय (Best Time to Transmute Energy)
लेकिन… इसके लिए मूलाधार से काम-केंद्र पर उर्जा का इकत्रित होना जरूरी है!
इसलिए योन-मुद्रा में तब प्रवेश करना है, जब हमारी उर्जा काम-केंद्र पर इकत्रित हो गई होती है! रात को नींद में गहरी श्वास चलने से मूलाधार चक्र को आक्सीजन मिलती है तो काम-केंद्र पर उर्जा इकत्रित हो जाती है! अतः सुबह-सुबह लिंगोत्थान होता है। लेकिन बिस्तर से उठने के बाद यह उर्जा मूत्र-मार्ग से बाहर चली जाती है। इसलिए पहले सुबह नींद से जागने के समय बिस्तर में योन-मुद्रा में प्रवेश करना है। दूसरा, जब भी मन में कामवासना का विचार उठे और शरीर गहरी श्वास लेकर केंद्र-केंद्र पर उर्जा भेजने लगे और काम-केंद्र सक्रिय होने लगे तब इस प्रयोग को करना है।
योन-मुद्रा का अभ्यास कैसे करें? (Step-by-Step Practice)
योन-मुद्रा के इस प्रयोग को कभी भी और कहीं भी किया जा सकता है। जहां कहीं भी कामवासना के पकड़ने पर तथा सुबह जागने पर जब काम-केंद्र पर उर्जा इकत्रित होने लगती है तब…आंखें बंद करके श्वास को गहरी और धीमी कर लेते हैं … इतनी धीमी और गहरी, जितनी रात सोते समय नींद में होती है।
फिर मूत्रद्वार और गुदाद्वार दोनों को भीतर सिकोड़ लेते हैं। ठीक उसी तरह भीतर सीकोड़ते हैं जिस तरह से हम मल-मूत्र को रोकने के लिए सिकोड़ते हैं!
और अब सारा ध्यान सिर में केन्द्रित करते हैं। आँखें बंद करके सारा ध्यान सिर में लगा देते हैं, जहां अंतिम सहस्त्रार चक्र है। सिर में उस जगह ध्यान केन्द्रित करते हैं जहां चुटिया होती है।
और ठीक उसी तरह से देखते हैं, जिस तरह से मानो हम अपने कमरे में बैठे हैं और गर्दन उठाकर उपर छत पर टंगे पंखे को देख रहे हैं। इस तरह भीतर से सिर में ध्यान लगाकर देखते रहते हैं… देखते रहते हैं… देखते रहते हैं… तो कुछ ही क्षणों में कामकेन्द्र पर उठी उर्जा, रीढ़ के माध्यम से चक्रों पर गति करती हुई सहस्त्रार चक्र की ओर बहने लगती है, और काम केंद्र शिथिल होने लगता है। यानी काम-उर्जा, ध्यान-उर्जा में परिवर्तित होने लगती है। अर्थात काम से राम की ओर यात्रा शुरू हो जाती है!
कामवासना के पकड़ने पर बस इतना ही करना है, आंखें बंद कर श्वास गहरी और धीमी करनी है! मूत्रद्वार और गुदाद्वार दोनों को भीतर सीकोड़ना है और ध्यान को सहस्त्रार चक्र में लगाना है!
काम से राम की ओर: Transmute sexual energy
बूंद बूंद से ही घड़ा भरता है! यदि हम अपनी बाहर जाती हुई इस उर्जा को भीतर मोड़कर उसका श्रृजनात्मक उपयोग कर लेते हैं। यदि हम कामकेंद्र पर उठी काम उर्जा को सिर में सहस्त्रार चक्र की ओर लौटा देते हैं तो धीरे-धीरे कामवासना विसर्जित होने लगती और कुंडलिनी जागरण के लिए रास्ता बनना आसान होता चला जाता है।