कुलदेवी कौन होती है | How to find your Kuldevi

कुलदेवी कौन होती है | Kuldevi

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कम से कम सनातनी या हिन्दू परिवार को कुलदेवी kuldevi की जानकारी जरूर होनी चाहिए। ये हमारे बड़े बुजुर्ग हैं जो हमारा भला चाहते हैं। यही अपने कुल को फलता फूलता देखना चाहते है।

सभी सनातन धर्म को मानने वाले हिन्दू परिवार किसी ना किसी महर्षि-ऋषि के वंशज है, यही हमारा गोत्र होता हैं। जिनसे उनकी कुलदेवी, गोत्र का पता चलता है।
हर जाति वर्ग, किसी न किसी ऋषि की संतान है। वे ऋषि या ऋषि पत्नी या वो शक्ति जिसकी वो ऋषि अराधना करते थे, वे ही हमारी कुलदेव/कुलदेवी के रूप में पूज्य हैं । प्राचीन काल से ही हमारे पूर्वज अपनी कुलदेवी (कुल के जनक) की पूजा करते आए हैं, ताकि उनके घर-परिवार और कुल का कल्याण होता रहे।

कुलदेवी की महिमा | Kuldevi Power

कुल देवी या देवता आध्यात्मिक, पारलौकिक या नकारात्मक शक्तियों से अपने कुलों की रक्षा करते हैं। जिससे नकारात्मक शक्तियों और ऊर्जाओं का खात्मा होता है, और कुल में सुख समृद्धि होती है। उनके कुल /कुनबा – कबीला उन्नति करते हैं।

कुलदेवी / कुलदेवता कुल या वंश के रक्षक देवी देवता होते है । ये सभी कुलों में प्रथम पूज्य तथा मूल अधिकारी देवी / देव होते है । इनकी स्थिति घर के बड़े, बुजुर्ग सदस्यों जैसी बहुत महत्वपूर्ण होती है । इसलिए: इनकी उपासना या इनको महत्त्व दिए बगैर सारी पूजा एवं अन्य कार्य व्यर्थ हो सकते है ।
यदि आप कुलदेवी के मंदिर या स्थान पर धोक पूजा के लिए नहीं जाते, और अन्य तीर्थों पर जाते हो तो समझो आप पिकनिक मना के ही आये हो।

कुलदेवी की कृपा से पुरे परिवार में सुख समृद्धि एवं सम्पन्नता आती है । कुलदेवी – कुलदेवता पुरे परिवार की रक्षा करते है, और उन्नति के द्वार खोलते हैं । सभी आने वाले संकटों को दूर कर देते है ।

हर प्रकार की पूजाओं में, यज्ञ में, शादी विवाह, मुंडन संस्कार में कुलदेवी, कुलदेवता की पूजा का विधान है । यदि कुलदेवी-कुलदेवता प्रसन्न हैं, तो समझो पितृ दोष भी दूर हो जाते है ।

कैसे पता चले कि कुलदेवी कौन है | How to find your Kuldevi

ये बात खोज का विषय है, कुलदेवी कौन है? लोगों ने अब भागदौड़ भरे जीवन, बिज़नेस, रोजी रोटी, नौकरी के चक्कर में लोग अपनी जड़ों से दूर हो गये, अपने पूर्वजो के जन्म स्थान से भी दूर हो गए | लोगों को पता ही नहीं कुलमाता कौन है? उसका पूजा पाठ कैसे किया जाता है?

हम किसी देवता की पूजा करते है, वो पता नहीं सुने ना सुने। यदि कुलदेवी की पूजा करते है वहां जरूर आपकी सुनवाई होगी। कुलदीपक ने बुलाया है, मेरे कुल के सदस्य ने बुलाया है, याद किया है। मां को याद किया है दौड़ी चली आएगी।

अपने पूर्वजो के बनाए रीती रिवाज भी छोड़ दिए। कुलदेवी और कुलदेवता की मान्यता, पूजा पाठ, उनका मान सम्मान भी छोड़ दिया।

आपके बड़े बुजुर्ग, आस पड़ोस की बुजुर्ग ओरतें जरूर जानती होंगी आपकी कुल देवी कौन हैं ,या फिर आपके गोत्र के कुनबे के लोग, चाचा, ताऊ, बुआ | उन्ही से पता कीजिए, थोड़ी कोशिश करनी होगी, इधर उधर फ़ोन घुमाओ, कुल देवी और उसका दिन, वार , तिथि का पता करो |

अगर पता चल जाता है, तो पांच -सात दिन दीपक करो, उसके बाद महीने में एक दिन होता है, कुल देवी का उस शाम को कुछ मीठा बनाओ और माता का भोग लगाओ।

कुलदेवी पूजा विधि

काफी कशिश के बाद भी कुलदेवी का पता न चले तो ये उपाय कीजिए

  • किसी भी दिन साबुत सुपारी खरीदें ( सुपारी खंडित ना हो साबुत होनी चाहिए ) शुक्रवार सुबह नित्ये कर्म से निबट कर पूजा के स्थान पर एक सिक्का रखें, उस पर सुपारी रखें, पास में घी का दीपक जलाएं।
  • जल की कुछ बुँदे सुपारी को अर्पित कीजिए, सुपारी के ऊपर मौली रख कर कहिए – माता जी वस्त्र अर्पित कर रहे हैं।
  • सुपारी पर सिंदूर लगा कर कहें – माता जी श्रृंगार ग्रहण कीजिए।

और हाथ जोड़ कर कहें अंत में हाथ जोड़कर सच्चे मन से कहें:

‘हे कुलदेवी माँ, मैं अज्ञानता के कारण आपका नाम और स्थान नहीं जानता। लेकिन आप मेरी कुल की रक्षा करने वाली शक्ति हैं। मैं आपको इस सुपारी में आवाहन करता हूँ। कृपया पधारें और मेरी पूजा स्वीकार करें।’

​विश्वास मानिए, माँ अपने बच्चे की पुकार जरूर सुनेंगी। जय माता दी!”

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